Karwa Chauth 2020: आखिर क्या है? करवा चौथ, जाने विस्तार में

Karwa Chauth 2020: भारतीय संस्कृति और अध्यात्म में स्त्री को शक्ति का स्वरूप माना गया है। करवा चौथ का पर्व भी स्त्री शक्ति की जागरूकता का पर्व है। दांपत्य जीवन और पुलिस का उत्कर्ष इसी शक्ति के प्रेम और उत्सर्ग पर टिका हुआ है।

यह पर्व हमें स्त्री शक्ति को समझने का अवसर प्रदान करता है। करवा चौथ इस बार 4 नवंबर को है, जो वर्षों से वैवाहिक जीवन का भावनात्मक केंद्र बना हुआ है। और यह पर्व में स्त्री शक्ति की होने का आभास करवाता रहा है।

हिंदू संस्कृति में हमेशा ही स्त्री-शक्ति का महत्ता रही है।ईश्वर को जब हम साकार रूप में देखते हैं तो उन्हें स्त्री-पुरुष रूपों में भी देखा जाता है। श्री हरि विष्णु के साथ हम मां लक्ष्मी को देखते हैं शिव के साथ पार्वती को देखते हैं और राम के साथ सीता को देखा जाता है।

इतना ही नहीं जब हम इन सभी का स्मरण करते हैं तो पहले स्त्री शक्ति का नाम आता है बाद में परम पुरुष का, हम सीताराम राधा कृष्ण गौरी शंकर आदि नामों से ईश्वर को याद करते हैं।

करवा चौथ भी स्त्री शक्ति की महत्ता को प्रतिपादित करता है और बताता है कि दांपत्य जीवन में स्त्री का प्रेम पूर्ण आचरण और परिवार के प्रति उसका दायित्व कितना अनमोल और महत्वपूर्ण है।

हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को पड़ने वाले इस पर्व में पत्नियां अपने पति के मंगल कामना के लिए निर्जल उपवास रखती हैं। विस्तृत सूची समवर्ती हैं और वह सभी श्रृंगार करते हैं जो एक दुल्हन का श्रृंगार हो होता है।

करवा चौथ का व्रत सभी हिंदू विवाहित महिलाओं के लिए विशेष महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि उनके द्वारा किया गया अन्य जल का यह उत्सव उनके पति की समृद्धि दीर्घायु और कल्याण को सुनिश्चित करता है।

करवा चौथ का ऐतिहासिक महत्व –

करवा चौथ की पारंपरिक कहानी भी स्त्री सशक्तिकरण का बोध कराती हैं इसके अनुसार ऐसा माना जाता है कि वीरवती उर्फ करवा नामक एक महिला के पति को नदी में स्नान करते हुए एक मगरमच्छ ने पकड़ लिया था। करवा ने मगरमच्छ को एक सूत्र से बांध दिया और यम से उसे नर्क में भेजने के लिए कहा यम ने मना किया, तो करवा ने यम को श्राप साथ देने की धमकी दी।

मान्यता है कि पतिव्रता स्त्री में मृत्यु के देवता यम का भी सामना करने की शक्ति होती है।

करवा चौथ का संबंध महाभारत से –

करवा चौथ का संबंध महाभारत काल से भी बताया जाता है। कहा जाता है कि द्रोपदी ने भी इस व्रत का पालन किया था।एक बार अर्जुन तपस्या के लिए निलगिरी में गए और कहा कि पांडवों को उनकी अनुपस्थिति में कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। द्रोपदी ने हताश होकर भगवान कृष्ण को याद किया और मदद मांगी।

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Karwa Chauth 2020 आखिर क्या है करवा चौथ, जाने विस्तार में

भगवान कृष्ण ने उन्हें बताया कि इस बार जब देवी पार्वती ने भगवान शिव से ऐसी ही परिस्थितियों में मार्गदर्शन मांगा था उन्हें करवा चौथ के व्रत का पालन करने की सलाह दी गई थी। द्रोपति ने भी निर्देशों का पालन किया और करवा चौथ का व्रत रखा। इसका परिणाम यह हुआ कि पांडव अपनी समस्याओं से पार पाने में सफल रहे।

करवा चौथ के दिन क्या करें व्रत रखने वाली महिलाएं –

इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं करवाचौथ की पौराणिक कथाओं को ध्यान से सुनती है सत्यवान और सावित्री की कहानी भी उनमें से एक है जो पतिव्रता स्त्री के जुझारू पन को दर्शाती है। और यह सिखाती है कि हमें विकट परिस्थितियों से किस प्रकार से सामना करते हुए निकलना चाहिए।

प्राचीन काल की स्त्रियां क्या करती थी करवा चौथ के पर्व पर –

प्राचीन समय में इन लड़कियों की शादी छोटे उम्र में हो जाती थी और उन्हें दूसरे गांव में अपनी ससुराल में पर्दा प्रथा में ही रहना पड़ता था। करवा चौथ के अवसर पर गांव की सारी विवाहित महिलाएं एक साथ एकत्रित होकर एक दूसरे से चर्चा कर पाती थी.

इससे उनमें सकारात्मक ऊर्जा आती थी और वे परिवार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनने का साहस पाती थी इस त्यौहार ने इन महिलाओं को प्रेम और समानता का अनूठा अर्थ दिया है आपस में हंसी बोलती खुद को नकारात्मक विचारों से मुक्त करती थी और एक दूसरे के साथ अपने प्यार और सहानुभूति को भी साझा करती थी।

करवा चौथ के मुख्य महत्व –

इस व्रत का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पतियों के अपने जीवन में अपने पत्नियों के महत्व का एहसास होता है। यह स्त्रियों के त्याग और बलिदान को भी प्रकट करता है। जो पतियों कोई एहसास दिलाता है कि पत्नियां जीवन में सभी क्षेत्रों में अपने पति के लिए निस्वार्थ भाव से काम करती हैं इस भावना से मन में अपनी पत्नियों के लिए प्रेम उमड़ता है। प्रेम सकारात्मक ऊर्जा का सबसे शक्तिशाली स्रोत है और प्रेम ही करवा चौथ का मूल भी है।

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